Sambandh Ka Ke Ki cover art

Sambandh Ka Ke Ki

Sambandh Ka Ke Ki

By: Himanshu Bhagat
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A conversation on books, conducted in Hindi.Himanshu Bhagat Art Literary History & Criticism
Episodes
  • एपिसोड 37: 'शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड' − संघमित्रा चक्रवर्ती
    Aug 14 2025

    फिल्म जगत की एक मशहूर 'एक्टर-डायरेक्टर' जोड़ी थी, सत्यजीत रे और शौमित्रो चटर्जी की। शौमित्रो ने रे की २८ फिल्मों में से १४ में मुख्य किरदार निभाया। इन १४ फिल्मों के अलावा शौमित्रो ने और भी बहुत कुछ किया। अपने ६० साल के करियर में उन्होंने पुरे ३०० फिल्मों में काम किया। साथ-साथ, वे एक 'थिएटर-एक्टर', नाटककार, लेखक, कवि, संपादक, और चित्रकार भी थे। जनवरी 2020 में शौमित्रो ८५ साल के हो गये और उस साल उनकी सात फिल्में रिलीज़ हुई थीं। उसी वर्ष, शौमित्रो का देहांत हो गया। उनकी जीवनी 'शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड' में संघमित्रा चक्रवर्ती लिखती हैं कि सत्यजीत रे के गुज़र जाने के बाद बंगाल के पास सिर्फ शौमित्रो ही बचे थे। सुनिए संघमित्रा के साथ उनके इस कथन और शौमित्रो चटर्जी के जीवन के अन्य पहलुओं पर एक चर्चा।

    (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)

    1. इंस्टाग्राम पर संघमित्रा चक्रवर्ती
    2. एक्स (ट्विटर) पर संघमित्रा चक्रवर्ती
    3. फेसबुक पर संघमित्रा चक्रवर्ती
    4. 'शौमित्रो चटर्जी एंड हिज़ वर्ल्ड' अमेज़न पर
    5. संघमित्रा चक्रवर्ती का अपना वेबसाइट


    (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

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    1 hr and 23 mins
  • एपिसोड 36: 'अपरूटेड' − ईता मेहरोत्रा
    Aug 3 2025

    विश्व भर में विकास के नाम पर जंगल काट कर ख़त्म किये जा रहे हैं। ऐसे में, अगर सरकार जंगल के एक टुकड़े को नेशनल पार्क घोषित कर देती है और वहाँ आदमी के निवास व आवाजाही को वर्जित कर देती है, तो इस को अच्छा ही माना जायेगा। मगर सदियों से इन्ही जंगलों का एक अभिन्न हिस्सा रहे हैं, इनमे वास करने वाले आदिवासी। अगर वन संरक्षण के नाम पर उनको किसी नेशनल पार्क से जबरन निकाल दिया जाय, तो क्या ये उचित होगा? आज, उत्तराखंड की वन-गूजर जनजाति इसी विडम्बना का शिकार है। ईता मेहरोत्रा अपनी ग्राफ़िक या चित्रपट शैली में बनाई गई पुस्तक 'अपरूटेड' में वन गुज़रों की व्यथा और उनकी परिस्थितियों की दृढ़ता से सामना करने की क्षमता -- दोनों पर प्रकाश डालती हैं। सुनिए ईता के साथ एक चर्चा उनकी संवेदनशील पुस्तक पर।

    (आप शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)

    1. इंस्टाग्राम पर ईता मेहरोत्रा
    2. 'अपरूटेड' अमेज़न पर
    3. 'शाहीन बाघ' अमेज़न पर
    4. एपिसोड 13: ‘स्टार्री स्टार्री नाईट’ – नंदिता बासु


    (‘सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

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    46 mins
  • एपिसोड 35: 'द डिस्मैंटलिंग ऑफ़ इंडिया'ज़ डेमोक्रेसी' − प्रेम शंकर झा
    Jul 10 2025

    प्रेम शंकर झा की नई किताब का नाम है − 'द डिस्मैंटलिंग ऑफ़ इंडिया'ज़ डेमोक्रेसी'; हिंदी में कहें तो, 'भारतीय लोकतंत्र का विध्वंस'। झा को पत्रकारिता करते हुए पचास से ज़्यादा साल हो चुके हैं और वे देश के प्रतिष्ठित अखबारों में संपादक रह चुके हैं। उनका मानना है कि आज भारत में लोकतंत्र अपने अंतिम चरण पर है। इसके चारों स्तम्भ − कार्यपालिका (एक्सीक्यूटिव), विधान मंडल (लेजिस्लेचर), न्यायपालिका, और प्रेस या मीडिया − खोखले हो चुके हैं। क़िताब में झा बताते हैं कि किन कारणों से भारत की राजनीति और भारतीय समाज, दक्षिणपंथी राजनीति के चपेट में आ गए हैं। यानी, किन कारणों से भारत में हिंदुत्व की राजनीति का प्रभाव इतना बढ़ गया है। और, क्यों इस राजनीती से देश में लोकतंत्र और देश की अखंडता − दोनों को गंभीर खतरा है।

    (आप⁠ शो-नोट्स https://sambandh-kakeki.com/ पर भी देख सकते हैं।)

    1. फेसबुक पर प्रेम शंकर झा
    2. 'द डिस्मैंटलिंग ऑफ़ इंडिया'ज़ डेमोक्रेसी' अमेज़न पर
    3. प्रेम शंकर झा की अन्य पुस्तकें अमेज़न पर


    ('सम्बन्ध का के की’ के टाइटिल म्यूज़िक की उपलब्धि, पिक्साबे के सौजन्य से।)

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    1 hr and 13 mins
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