• ।। कमीयों के कारण भगवत प्राप्ति की उम्मीद नहीं छोड़नी ।।
    May 1 2026

    * कमियों से यह नहीं सोचना कि भगवत प्राप्ति कैसे होगी


    * भगवान तो केवल प्रेम देखते है


    * यह मानना गलत है कि भगवत प्राप्ति कठिन है


    * जब तक इंद्रियों के माध्यम से बाहर का सुख लेते रहोगे तब तक अंदर ही छुपा हुआ आनंद का अनुभव नहीं होता - यह नियम है


    * भागवत प्रेम का थोड़ा सा भी छीटा पड़ जाए तो यह इंद्रियां और मन अपने आप वश में आने लगते हैं


    * बहुत समय तक अपनी चतुराई का अभिमान, अपनी बुद्धि का अहंकार बना रहता है


    * हमारी संस्कृति की मुख्य आधार महिलाएं हैं, आदमी तो बिना वजह अकड़ में घूम रहा है


    * भगवान का कोई भी जप चुपचाप करते रहो


    * जीवन में सभी अच्छी बातों के प्रदर्शन से बचना चाहिए, किसको बताना चाह रहे हो जानने वाला तो सब जानता है


    * जो कह दोगे वह कम होने लग जाएगा अच्छाइयां अपनी रहते रहोगे वह काम हो जाएंगे अपनी बुराइयां व्यक्त करते रहोगे तो वह काम हो जाएंगे

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    29 mins
  • ।। कमियां दूर क्यों नहीं होती ।।
    Apr 30 2026

    * अंदर कमी मिटानी की जलन पैदा नहीं होती


    * अपनी शक्ति तो पूरी लगनी है पर आश्रय भगवान का


    * बिना भगवान के आश्रय के अहंकार हो जाएगा


    * जो कमी है उसके विपरीत गुण लाने की चेष्टा करो, लोभ की जगह दान, क्रोध की जगह क्षमा, वासना की जगह प्रेम, निर्दयता के स्थान करुणा


    * जिसकी आयु 25 साल है वह भी कभी भी मर सकता है, इस लिये इस भ्रम में मत रहना कि समय बहुत है, तड़प लाओ और उनको पुकारो


    * मनुष्य शरीर मिलने का एक मात्र प्रयोजन भगवत्प्राप्ति है, बाकी सब बेकार है


    * काम सारे करने हैं, अंदर की नीयत बदलनी है


    * मन खुद को ठगने में बड़ा प्रवीण है


    * पश्चाताप की अग्नि से अन्तःकरण शुद्ध होता है


    * अच्छा काम करने की कोशिश मत करो, गलत काम करना छोड़ दो


    * रात दिन लगे रहो लगे रहो


    * बार बार कहता रहो हे नाथ आपको भूलू नहीं


    * हमारा वास्तविक स्वरूप न अच्छा है न बुरा है


    * वर्ण का रहस्य

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    22 mins
  • सांसारिक ज्ञान को सीखने का कोई अंत?
    Apr 30 2026

    * मुख्य चीज अपने अंदर की शांति और आनंद


    * अपनी स्थिति को देखते हुए और अपने अंदर की शांति व आनंद को बनाए रखते हुए जितना सीख सकते हो सीख लो । सीखने का परंतु कभी कोई अंत नहीं आने वाला


    * सहज भाव से जितना सीखा जाए सीख लो और फिर शांत रहो


    * मानव जीवन मिलने के पश्चात दुखी होना महा मूर्खता की बात है


    * अनुकूल परिस्थिति में हर्षित होना और प्रतिकूल परिस्थिति में दुखी होना यह दोनों आज्ञा के कारण है


    * कर्तव्य कर्म करो उसमें रस मत लो


    * आसक्ति Attachment आत्मज्ञान में सबसे बड़ी बाधा


    * चैन से शांत बैठना नहीं आता अब

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    39 mins
  • Great Minds Of India
    Apr 30 2026

    Great Minds Of India

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    10 mins
  • || भगवान प्राप्त है - ये मान लो ||
    Apr 30 2026

    || भगवान प्राप्त है - ये मान लो ||

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    6 mins
  • ।। 'करना', 'होना', 'है' ।।
    Apr 29 2026

    *जब तक करना होता है, तब तक अहंकार की प्रधानता होती है


    * फिर यह प्रतीत होता है की सब हो रहा है


    * जिसमें परिवर्तन होता है,जैसे कि संसार में,वह वास्तव में होता नहीं, परिवर्तनशील को देखने के लिए उसका आधार अपरिवर्तनशील होना चाहिए, वह जो अपरिवर्तनशील है वह ही है जो वास्तव में ' है '



    * भगवत गीता के 13 अध्याय के 2 श्लोक में भगवान ने कह दिया है क्षेत्र क्षेत्रगया का जो ज्ञान है यही सही में ज्ञान है और इस ज्ञान को जानकर हम मुक्त हो जाते हैं


    * गलत मानयाता से बंधन था सही मानयाता से मुक्ति हो जाती है


    * प्रेम का अंत नहीं आता वह बढ़ता ही चला जाता है



    * ज्ञान पूर्वक कर्तव्य करो इतनी सी बात कुल है


    * तुम तो अपने को भगवान के कार्य का निमित्त मात्र मान लो ।" मैंने किया " यह निकल जाए


    * भगवान तुम्हारी बुद्धि के पकड़ में नहीं आ सकते


    * ना तो समस्या ग्रंथ की ना आत्मा को समस्या ना ब्रह्मा को, समस्या केवल तुम्हें है कि तुम बेचैन हो

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    22 mins
  • ।। फिर भी हम क्यों अटके हुए हैं ।।
    Apr 27 2026

    *मनुष्य के विकास में पहले तमस प्रधान फिर राजसिकता आती है उसके पश्चात सात्विकता आरंभ होती है


    * सात्विकता के बढ़ने पर एक समय पर बात समझ में आ जाती है लेकिन चैन फिर भी नहीं मिलता


    * बुद्धि से समझ में आ जाना और वैसा वास्तविक हो जाना इनमें अंतर है


    * समझ में आने के बाद वैसा बनने की कोई चेष्टा करता है उसे कहते हैं साधना


    * भगवान के विधान में जब पूरी लगन होती है तो गुरु भी मिल जाते हैं


    * जब तक समर्पण नहीं घटता, आज्ञा पालन नहीं होता, तब तक गुरु की पूरी बात बताई हुई भी अंदर नहीं उतरती


    * सूक्ष्म अहंकार के बड़े सारे रूप है


    * पुकार लगाओ- मैं अच्छा हूं बुरा हूं मैं नहीं जानता जैसा भी हूं यह जानता हूं कि मैं आपका हूं आप मेरे हो और मैं आपके चरणों में पड़ा हूं


    * अटकाव केवल यह है की आसक्ति है संसार के प्रति और यहां के पदार्थ के प्रति


    * बाद में सेवा बन जाती है पूजा


    * चलते चलो रुको मत - भगवान का स्मरण, कर्तव्य कर्म

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    40 mins
  • ।। ऐसा हो ऐसा ना हो ।।
    Apr 25 2026

    ।। ऐसा हो ऐसा ना हो ।।

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    1 min