एपिसोड 1: शून्य की ओर पलायन | Arjun Bharti Mina cover art

एपिसोड 1: शून्य की ओर पलायन | Arjun Bharti Mina

एपिसोड 1: शून्य की ओर पलायन | Arjun Bharti Mina

Listen for free

View show details

About this listen

एपिसोड 1: शून्य की ओर पलायनआसमान का रंग अब नीला नहीं, बल्कि तांबे जैसा सुर्ख लाल था। श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड पर खड़ा विशालकाय 'नाविक-1' किसी जहाज जैसा नहीं, बल्कि लोहे के एक ऊंचे पर्वत जैसा दिख रहा था। चारों तरफ साइरनों की गूँज थी और हवा में जलती हुई ओजोन की कड़वाहट घुली थी।कंट्रोल रूम के अंदर, अर्जुन अपनी पायलट सीट पर शांत बैठा था। उसने अपनी जेब से एक छोटा सा कलश निकाला, जिसमें उसके गाँव की मिट्टी थी। उसने उसे कसकर भींचा और फिर डैशबोर्ड के पास रख दिया। तभी उसके कानों में एक तीखी, कड़क आवाज़ गूँजी।"कैप्टन अर्जुन, अगर मिट्टी से मोह खत्म हो गया हो, तो क्या हम मानवता को बचाने के काम पर वापस लौटें?"अर्जुन ने सिर घुमाया। बगल की सीट पर कायरा एलिन बैठी थी। उसकी आँखों में कोई डर नहीं था, सिर्फ ठंडी गणना थी। कायरा ने अपने दस्ताने कसे और सामने तैर रही होलोग्राफिक स्क्रीन पर डेटा की बौछार कर दी।"तैयार हूँ, कायरा," अर्जुन ने धीमे स्वर में कहा। "लेकिन याद रखना, अगर आज हम सफल हुए, तो हम फिर कभी इस ज़मीन को नहीं देख पाएंगे।""यही तो योजना है, अर्जुन। पीछे जो बचा है वो सिर्फ राख है। आगे जो है, वो भविष्य है।" कायरा के स्वर में कोई हिचकिचाहट नहीं थी।अचानक, जहाज की AI प्रणाली, सारा, की डिजिटल आवाज़ केबिन में गूँजी, "प्रोजेक्ट 'द लास्ट एक्सोडस' शुरू किया जा रहा है। न्यूरल-लिंक सक्रिय है। कैप्टन अर्जुन, सिंक शुरू करें।"जैसे ही अर्जुन ने न्यूरल-कैप पहना, हज़ारों महीन सुइयां उसकी खोपड़ी से जुड़ गईं। एक भयंकर बिजली का झटका उसके पूरे शरीर से होकर गुज़रा। उसकी चीख केबिन की दीवारों से टकराकर रह गई। उसका दिमाग अब 'नाविक-1' के मुख्य कंप्यूटर से जुड़ चुका था। उसे महसूस हो रहा था कि जहाज के हाइड्रोलिक पाइप्स उसकी नसें बन गए हैं और इंजन की धड़कन उसके दिल की धड़कन।"इंजन... जाग्रत हो गया है," अर्जुन की आवाज़ अब बदल चुकी थी, उसमें एक मशीनी गूँज थी।"काउंटडाउन शुरू! 10... 9... 8..." सारा की आवाज़ गूँज रही थी।जैसे ही गिनती शून्य पर पहुँची, नाविक-1 के आधार से नीली प्लाज्मा अग्नि की ऐसी लपटें उठीं कि पूरा द्वीप काँप उठा। हज़ारों टन लोहा आसमान की ओर बढ़ा। गुरुत्वाकर्षण का दबाव इतना था कि अर्जुन और कायरा अपनी सीटों में धँस गए। देखते ही देखते, आसमान का लाल रंग काला पड़ गया। वे वायुमंडल को चीरकर...
No reviews yet
In the spirit of reconciliation, Audible acknowledges the Traditional Custodians of country throughout Australia and their connections to land, sea and community. We pay our respect to their elders past and present and extend that respect to all Aboriginal and Torres Strait Islander peoples today.