जिस सुबह आपको घर ले जाया जाता है cover art

जिस सुबह आपको घर ले जाया जाता है

जिस सुबह आपको घर ले जाया जाता है

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सुबह की पहली किरणें जब चुपचाप बिखरती हैं, तो एक साधारण सा दिन शुरू होता है। कॉफी की खुशबू हल्के से हवा में घुलती है। और फिर एक दस्तक होती है, जो सब कुछ बदल देती है। दरवाजा खोलते वक्त, आधे सोए से, काम की चिंताएँ मन में चल रही होती हैं। फिर एक आवाज आती है, जो पहले से तैयार लगती है, और आपसे बाहर आने को कहती है।

आपने कभी कुछ गलत नहीं किया, फिर भी आज आप एक खतरा कहलाए जाते हैं। हर संभव प्रयास किया, हर जिम्मेदारी निभाई। परिवार को सँभाला। वो घर, जिसे आपने सालों में बनाया, अब बस एक नजर भर देख सकते हैं। उन दीवारों को अलविदा कहना, जिनमें आपकी जिंदगी की कहानियाँ बसी हैं, आसान नहीं होता।

फिर हवाई जहाज की ठंडी सीट पर बैठे हैं। जहाँ जा रहे हैं, वह जगह परिचित है, लेकिन घर नहीं। वहाँ की यादें धुंधली हैं। आप नहीं जानते, जब लैंड करेंगे तो आप कौन होंगे। बस यह जानते हैं कि सब कुछ सही करते हुए भी, यहाँ रुकना काफी नहीं था। दूरी अब आपकी पहचान बन गई है। कुछ सवाल जवाब नहीं मांगते, बस बोझ उठाने की माँग करते हैं। और वह बोझ, जो अकेले उठाना पड़ता है, सबसे भारी होता है।

यह पॉडकास्ट व्यक्तिगत कहानियाँ और आत्मचिंतन साझा करता है, न कि पेशेवर मार्गदर्शन। यदि आप किसी कठिन समय से गुजर रहे हैं या सहायता की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं, तो किसी योग्य विशेषज्ञ से संपर्क करना मददगार हो सकता है।

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In the spirit of reconciliation, Audible acknowledges the Traditional Custodians of country throughout Australia and their connections to land, sea and community. We pay our respect to their elders past and present and extend that respect to all Aboriginal and Torres Strait Islander peoples today.