आप इसके बिना कौन हैं
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शाम के हल्के उजाले में, जब सवाल हवा में तैरता है, "तो... तुम क्या करते हो?" कभी इसका उत्तर स्पष्ट था, एक पहचान का टुकड़ा, जिसे तुमने गर्व से थामा हुआ था। दिन की थकान और उलझनों के बीच, यह सरलता का एक क्षण था। फिर बिना किसी अलार्म के, वह जवाब धुंधला होने लगा। एक बैठक का पल, एक बिना सुना फैसला, और एक पहचान खो गई।
अब तुम उन शब्दों को दोहराते हो, जो कभी तुम्हारे थे। "मैं था..." शब्द की गूंज, जो तुम्हारे भीतर कुछ खींचता है। यह नौकरी की कमी नहीं, बल्कि उस समझ की है, जो कभी सहज थी।
फॉर्म की खाली जगह में, तुम खुद को खोजने की कोशिश करते हो, जो अब कुछ अंतिम सा लगता है। सुपरमार्केट में एक पुराना परिचित मुस्कुराते हुए पूछता है, "तो, अब तुम क्या कर रहे हो?" तुम्हारे पास जवाब नहीं, बस एक हल्की मुस्कान और कुछ अस्पष्ट शब्द।
दिन का गुजरना अब बस एक गुजरता वक्त है। सुबह का कोई आरंभिक संकेत नहीं, बस एक और सुबह। तुम्हारी पहचान का एक हिस्सा, जो कभी डेडलाइन्स और मीटिंग्स से भरा था, अब खालीपन में गूंजता है। तुम खुद के उस संस्करण से मिलते हो, जिसे सालों से नहीं देखा। हाथों की हरकत, ऊर्जा का बहाव, सब नया लगता है, जैसे एक अनदेखी यात्रा पर चल पड़े हो।
यह पॉडकास्ट व्यक्तिगत कहानियाँ और आत्मचिंतन साझा करता है, न कि पेशेवर मार्गदर्शन। यदि आप किसी कठिन समय से गुजर रहे हैं या सहायता की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं, तो किसी योग्य विशेषज्ञ से संपर्क करना मददगार हो सकता है।