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जीवन की सरगम JIVAN KI SARGAM

स्वर कुछ मेरे, कुछ तुम्हारे

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जीवन की सरगम JIVAN KI SARGAM

By: Meenakshi Pathak
Narrated by: Meenakshi Pathak
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“जवन क सरगम; सवर कछ मर, कछ तमहर

जवन क सरगम उन अनसन आवज क गज ह, ज हर नर क मन म कह न कह बस हत ह, कभ परम, पड म, त कभ आतम-खज क यतर म |

यह सगरह एक सधरण भष म, असधरण भवनओ क उजगर करत ह i

परम, समरपण, असतष, उममद, रशत क परत और आतमक सतलन क खज—यह सब समय ह इन पकतय म i

“एहसस, तम मल और जदग” कवत म परम और समरपण क भवनय उजगर हत ह वह “हमजल” तथ “हमसफर” म कछ नरश, हतश क भव समन आत ह | “कय” “जन कय” और “मन करत ह” कवतय म नर क मन म अनक परशन उठत दखत ह |

“व आसम अपन“ एव “कनर क आस“ जस कवतय जवन म उममद भ जगत दखत ह |

“बद” कवत , कदरनथ धम जन क आपद म अपन क खन वल क दख मन क वयथ स पररत ह.

“कच क रशत” तथ “न अलग कर उनह” जस कवतओ म कह आप जवन क बदलत सबध और रशत क परशन क समझन क कशश अवशय कर सकग, त कह जवन जन क अलग रह पर चल पडग |अपन जवन क खशहल बनन चहत ह त आप इन कवतओ क जरर पढ | य कवतए आपक एक नई सच और नई दश म ल जन क परयतन ह |

इस सरगम क कवतय क सवर क मधयम स अपन आपस रशत म उन छट-छट खशनम पल क पकडन सख और आपस म खश रहन क कशश कर, कयक अकसर खशय आपक आस-पस ह हत ह |

यद आप अपन जवन क भगदड स कछ पल नकलकर खद स जडन चहत ह, त यह कवय-सगरह आपक अपन ह भतर क आवज स मलन क आमतरण दत ह शबद क इस सरगम म शयद आपक आपक ह जवन क कछ सर मल जए i

Please note: This audiobook is in Hindi.

©2024 Meenakshi Pathak (P)2025 Meenakshi Pathak
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